अभिनंदन का अभिनंदन

अभिनंदन उस अभिनंदन को जिसने बदली इस शब्द की परिभाषा,
अभिनंदन उस अभिनंदन को जिसने रच डाली अपनी वीर गाथा।
अभिनंदन उस  अभिनंदन को जो मुश्किलों में भी खड़ा रहा,
अभिनंदन उस अभिनंदन को जो देश की लिए सीना ताने अड़ा रहा।

डर भी ना उसको डरा सका,
ना कोई उसको झुका सका।
सरहदें पार ना कोई इन्हें छू पाए,
मुछो को ताओ दे पिये ये वीर मीठी चाय।

ऐसे होते है मेरे जवान,
खून खून में है इसके, लिखा मेरा हिंदुस्तान।
लौट आये सलामत लिख दिया इतिहास,
कितने ही लिखो गीत या उपन्यास।

अभिनंदन उस अभिनंदन जिससे हैरान है सारा संसार,
तुम ही हो मित्र, वीरता के वो नए आसार।

© मोहित

DISCLAIMER: all of the content above are the original works of the author and its reproduction in any way is highly discouraged




Comments

READOCS said…
Nice one bro
Unknown said…
Very well said.
KAUSTUBH said…
well written bro

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