मैं शायर तो नहीं
मैं शायर तो नहीं पर लिखने का तज़ुर्बा जरूर रखता हूं। में कवी तो नहीं पर हर वक़्त इस कलम को यूँही जरूर देखता हूं। शब्दों में इतनी मिठास तो नहीं, कभी सुकून के लिए मैं भी यूँही लिख लिया करता हूं। मैं शायर तो नहीं पर कुछ ख्वाब जरूर देखता हूं। कभी कभी मैं भी उन खली पन्नो से मुख मोड़ लेता हूं। शब्दों के इस लीबाज़ में कोई जोश तो नहीं, पर कभी मैं भी "पोयम" से कविता का रुख़ कर ही लेता हूं। मैं शायर तो नहीं पर कोशिश जरूर करता हूं। शब्दों को मोड़कर, कुछ शब्दों को यूँही जोड़ दिया करता हूं। आशा है आपको ये पसंद आया हो, मैं शायर तो नहीं पर लिखने का तज़ुर्बा जरूर रखता हूं। © Mohit Jha Painting by : shubham shingla Disclaimer : all of the above are the original works of the poet and its reproduction in any kind is highly discouraged.